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51 शक्तिपीठों में से एक है मैहर शक्ति पीठ ,



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  • चैत्र नवरात्र आज से प्रारम्भ, मां की भक्ति में डूबे लोग


  • सतना।  सतना जिले के मैहर में त्रिकूट पर्वत में विराजमान मां शारदा का मंदिर 51 शक्ति पीठ में से एक हैं।यहां आस्था का अनोखा समागम देखने मिलता है।  मैहर की मां शारदा मंदिर का महत्व चैत्र नवरात्र व शारदेय नवरात्र में और भी अधिक बढ जाता है। इस अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालू मैहर पहुंच माॅ शारदा के दर्शन लाभ लेते है। इस मंदिर के बारे में यह कहा जाता है कि सतयुग में  एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान शंकर के तांडव नृत्य के दौरान उनके कंधे पर रखे माता सती के शव से गले का हार त्रिकूट पर्वत के शिखर पर आ गिरा। इसी वजह से यह स्थान शक्तिपीठ का नाम माई का हार के आधार पर मैहर के रूप में विकसित हुआ। वक्त गुजरता गया और धीरे.धीरे मां शारदा का यह धाम माइहार से मैहर धाम हो गया। जो आज मैहर नाम से जाना जाता है।

    आस्था की कहानी - बताया जाता है कि  दुर्गम पहाड़ी और घने जंगल के मध्य में मां शारदा की मूर्ति थी जहा छोटा सा मंदिर था जिसके बारे में किसी को भी जानकारी नही थी। मां शारदा के आराध्य भक्त आल्हा जो महोबा के रहने वाले थे, प्रतिदिन मां की पूजा अर्चना करने आते थे। आल्हा की श्रद्धा से खुश होकर मां शारदा ने आल्हा को अमर होने का एवं प्रथम पूजन करने का वरदान दिया था।  यही वजह है कि आल्हा आज भी अमर हैं जिसका प्रमाण आज भी देखने को मिलता है। आल्हा आज भी आते हैं और प्रथम पूजा करते हैं मंदिर के पट खुलने के पहले जल और फूल का चढ़ा होना इसका प्रमाण है। मंदिर के नीचे पीछे की ओर आल्हा कुंड और आल्हा अखाड़ा भी बना हुआ है इस कुंड में आल्हा आज भी स्नान करते हैं लेकिन किसी ने आज तक नही देखा और जिसने देखने की कोशिश की तो मानसिक संतुलन खो दिया या दुनिया में नही रहा। आल्हा मंदिर के पुजारी का कहना है कि भोर में आज भी आल्हा के आने की आहट सुनाई देती है जिसको हमने महसूस किया है इस पहाड़ी की ऊंचाई 700 फिट है जहां मां शारदा का मंदिर स्थित है मंदिर के प्रचलित इतिहास के बारे में आधार नही है किन्तु ऐसा बताया गया है कि मंदिर की स्थापना 448 ईस्वी से 548 ईस्वी सन् के बीच हुई। आदि गुरू शंकराचार्य व चंदेल वंश के राजा आल्हा ऊदल द्वारा मंदिर की स्थापना की थी। इस मंदिर में एक शिलालेख प्राचीन भाषा में आज भी है जिसका अनुवाद आज भी नहीं हो सका है।

     आधुनिकता के साथ बदला मैहर - मां शारदा मंदिर को आधुनिकता के साथ अलग पहचान मिली है आज मैहर क्षेत्र एवं मंदिर की जानकारी और माॅं शारदा के दर्शन लाभ सेटेलाइट व सोशल मीडिया के माध्यम से आनलाइन लिए जा सकते है। मैहर माॅं शारदा प्रबंध समिति द्वारा भी यहां आने वाले श्ऱद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। मध्यप्रदेश के सतना जिले में मैहर तहसील में त्रिकूट पर्वत पर स्थित माता के इस मंदिर को मैहर देवी का शक्तिपीठ कहा जाता है। मैहर का मतलब है मां का हार। माना जाता है कि यहां मां सती का हार गिरा था इसीलिए इसकी गणना शक्तिपीठों में की जाती है। करीब 1063 सीढ़ियां चढ़ने के बाद माता के दर्शन होते हैं। पूरे भारत में सतना का मैहर मंदिर माता शारदा का अकेला मंदिर है । पूर्व में मंदिर में आने जाने के लिये कोई रास्ता नही था। 1956 में पहाड़ी को काट कर सीढि़यों का निर्माण किया गया, फिर वाहन आने जाने का रास्ता बनाया गया अब रोपवे की सुविधा भी है। इस मंदिर की ख्याती और प्रसिद्धता देश के कोने कोने में है। पूरे देश से भक्तगण मां के दर्शन के लिये मैहर आते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं जो पूर्ण होती है। चैत्र नवरात्री एवं क्ंवार की नवरात्री मे दो बार विशाल मेला भी लगता है इस मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालू मां के दर्शन के लिये आते हैं। इन श्रद्धालुओं में बिहार, महाराष्टª, उत्तर प्रदेश, राजस्थान,प0 बंगाल के लोग आते हैं। आज मैहर में मां शारदा धाम तक ट्रेन व सडक दोनो ही  मार्गो से पहुंचा जा सकता है।  मैहर का विकास व मां शारदाधाम के बदलते स्वरुप से यहां आने वाले श्रद्धालू भी भाव विभोर है।